सांघी जी मन्दिर, सांगानेर

सांघी जी मन्दिर, सांगानेर

मन्दिर में मूल प्रतिमा आदिनाथ भगवान की है तथा इस प्रतिमा के आगे अन्य प्रतिमाओं की वेदी बनी हुई है ।

जयपुर (राजस्थान) की दक्षिण दिशा में लगभग 13 किमी दूरी पर सांगानेर कस्बा स्थित है । सांगानेर कस्बे में प्राचीन दिगम्बर जैन मन्दिर है , जो कि सांघी जी के मन्दिर के नाम से प्रसिद्ध है ।

मन्दिर का निर्माण कब हुआ इसका सही आकलन नहीं किया जा सकता, परन्तु विद्वानों के अनुसार मन्दिर का निर्माण आठवी सदी में हुआ था। मन्दिर के एक द्वार पर सम्वत् 1011 अंकित किया हुआ है।

मन्दिर में मूल प्रतिमा आदिनाथ भगवान की है तथा इस प्रतिमा के आगे अन्य प्रतिमाओं की वेदी बनी हुई है ।

मन्दिरजी में दो गुफाऐं है , जिन्हें वर्तमान में तल घर में बदल दिया गया है।प्रथम तल पर अति प्राचीन प्रतिमाएं विराजमान है तथा द्धितीय तल पर चौबीसी का निर्माण किया हुआ है ।
चौबीसी पर बडे शिखर बने हुये है । द्धितीय तल पर पाण्डुशिला का निर्माण किया हुआ है।मन्दिर जी की बाहरी दीवार पर भक्तामर स्त्रोत 48 श्लोको के शिलालेख बनाये गये है ।

मान्यता है कि मन्दिर जी कुल 7 मंजिल का बना हुआ है परन्तु अभी वर्तमान में केवल 2 ही मंजिल के ही दर्शन होते है ।मन्दिर जी के अन्दर की दीवार पर शिलालेख है, जिस पर मन्दिर जी के इतिहास के बारें मे लिखा गया है।

लोक मान्यता के अनुसार शिलालेख के पीछे एक द्धार है जिसके अन्दर से मन्दिर जी में जाया जा सकता है । मान्यता के अनुसार मन्दिर के तलघर में यक्ष देव द्धार आरक्षित जिन चैत्यालय हैं, जिसमें केवल बालयती तपस्वी साधु ही प्रवेश कर सकते है।

तलघर में स्थित जिन बिम्बों को जनता के दर्शनार्थ आचर्य श्री शान्तिसागर जी महाराज ने सन् 1933 में, आचर्य श्री देशभूषण जी महाराज ने सन् 1971 में आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज ने सन् 1994 तथा मुनि श्री सुधासागर जी महारज ने सन् 1999 में लाये थे । जिन्हें समय पर पुन: तलघर में रखा गया और तलघर के रास्ते को बन्द कर दिया गया।

मन्दिर जी में आवास, भोजनालय की सशुल्क व्यवस्था है तथा मन्दिर जी प्रांगण में ऋषभ देव ग्रंथ माला भी है, जैन धर्म से सम्बन्धित पुस्तकें व अन्य प्रतीक चिन्ह विक्रय केिये जाते है।

क्षेत्र में आवास व भोजन की व्यवस्था है।