महाराज जी

।जैन मुनि प्रणम्य सागर चमत्कारी संत : 


जैन मुनि प्रणम्य सागर महाराज संसार के प्रसिद्ध संत विद्यासगर  महाराज के शिष्य हैं । 
जैन मुनि ने बहुत थोड़े समय में ही अनेक सिद्धिया हासिल कर रखी हैं।  एक समय  १९ साल के युवा को दो मित्रो की मौत ने झकझोर कर रख दिया घटना ने उनके अंदर वैराग्य जगा दिया मुनि दीक्षा लेकर समाज में धर्म का प्रचार प्रसार कर रहे वही १९ वर्षीय युवा  आज जैन मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज हैं ।

प्रणम्य सागर महाराज का जन्म फिरोजाबाद के सिरसांगज में वीरेंद्र कुमार जैन के परिवार में १३ सितम्बर को १९७५ को हुआ मुनि दीक्षा से पूर्व उनका नाम सर्वेश था उनके परिवार में दो भाई - बहन और माता पिता है अंग्रेजी माध्यम में जैन मुनि ने बीएससी की डिग्री हासिल की है  ।

९ अगस्त १९९४ को जैन मुनि ने घर त्याग दिया था ।

जैन मुनि प्रणम्य सागर महाराज ने अहंकार का विसर्जन कर स्वय के सर्जन करने के लिए अहं ध्यान योग पुस्तक लिखने के साथ ही अंग्रेजी , संस्कृत , हिंदी भाषाओं में पाँच दर्जन पुस्तको की रचना की है प्राकृत भाषा ही संस्कृत और हिंदी का मूल स्रोत्र है। प्राकृत भाषा का प्रचार प्रसार कर लोगो को प्राकृत भाषा की प्रति जागरूक कर रहे हैं ।