गुरुवर मुझको दो ये वरदान

गुरुवर मुझको दो ये वरदान, रहे लब पे सदा तेरा नाम,
तेरी सेवा हो कर्म मेरा, तेरे चरणों मे हो सारे धाम ।।

रहे लब पे सदा तेरा नाम..

मुझको जब से तेरा दर मिला, मेरे वीराने में गुल खिला ।
मिट गई सारी उलझन मेरी, अब नहीं कोई तुझसे गिला ।।

ना...... हैं कोई गिला,

हो गई राहे मेरी आसान, रहे लब पे सदा तेरा नाम,
गुरुवर मुझको दो ये वरदान, रहे लब पे सदा तेरा नाम..

मेरी नजरो को मालिक मेरे, बस तेरा ही नजारा मिले ।
कुछ और मिले ना मिले, बस तेरा ही इशारा मिले ।।

हो..... इशारा मिले,

करू गुणगान मैं सुबह शाम, रहे लब पे सदा तेरा नाम,
गुरुवर मुझको दो ये वरदान, रहे लब पे सदा तेरा नाम..

जो गुजरे हवा तेरे दर से, उन हवाओं को मेरा सलाम ।
झुक गया सर मेरा उसके आगे, जिसके दिल मे बसा तेरा नाम ।।

हो....... बसा तेरा नाम,

अब तू ही मेरा हैं जहां, रहे लब पे सदा तेरा नाम,
गुरुवर मुझको दो ये वरदान, रहे लब पे सदा तेरा नाम,