आये तेरे द्धार सुन ले

आये तेरे द्धार सुन ले

आये तेरे द्धार सुन ले भक्तो की पुकार
त्रिशला लाल रे।


आये तेरे द्धार सुन ले
आये तेरे द्धार सुन ले भक्तो की पुकार
त्रिशला लाल रे ।

कुण्डल पुर में जनम लियो तब ,बजने लगी थी शहनाई,
दीपावली को मुक्ति पाई तब मन में सबने तहनाई,

तुम पा गए मुक्ति धाम
हम भी पाये निज का धाम ।
..त्रिशला लाला रे

सुंदर स्याद्वाद की सरगम ,जब तुमने थी बरसाई ,
भव्यपनो को आनंदकारी, अमृत धारा बरसाई,

भविजन तुमको निज सम जान
कर गये आतम का कल्याण त्रिशला लाल रे।

नीर शीर सम तन चेतन को ,भिन्न सदा ही बताया है
जिन चेतन के दर्शन पा ,निज चेतन दर्शन पाया है

मैं पाऊँ निज का धाम
वही सच्चा जिन का धाम, त्रिशला लाल रे