।। श्री धर्मनाथ जिनेन्द्र भगवान का अर्घ।।

।। श्री धर्मनाथ जिनेन्द्र भगवान का अर्घ।।

आठों दरब साज शुचि चित हर, हरषि हरषि गुनगाई ।
बाजत द्रृम द्रृम द्रृम मृदंग गत ,नाचत ता -थेई थाई ।।
परम धरम शम -रमन धरम -जिन ,अशरन शरन निहारी ।
पूजौं पाय गाय गुन सुन्दर , नाचौं दै दै तारी ।।

।। ॐ ह्रीं श्री धर्मनाथ जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ।।