।। श्री अनंतनाथ भगवान का अर्घ ।।

।। श्री अनंतनाथ भगवान का अर्घ ।।

शुचि नीर चन्दन शालिशंदन, सुमन चरु दीवा धरौं ।
अरु धूप फल जुत अरघ करि ,कर -जोर -जुग विनति करौं ।।
जग -पूज परम - पुनीत मीत ,अनंत संत सुहावनो ।
शिव कंत वंत महंत ध्यावौं ,भ्रंत वंत नशावनो।।
।। ॐ ह्रीं श्री अनंतनाथ जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ।।