।। श्री नेमिनाथ जिनेन्द्र ।।

।। श्री नेमिनाथ जिनेन्द्र ।।

जल फल आदि साज शुचि लीने , आठों दरब मिलाय ।

अष्टम छिति के राज करन को ,जजों अंग वसुनाय

दाता मोक्ष के , श्री नेमिनाथ जिनराय , दाता मोक्ष के ।।

।। ओं ह्रीं श्री नेमिनाथ जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घं निर्वपामिति स्वाहा ।।