।। श्री शांतिनाथ भगवान ।।

। श्री शांतिनाथ भगवान ।।

जल फलादि वसु द्रव्य संवारे अर्घ चढ़ाय मंगल गाय।

'बखतरतन' के तुमही साहिब दीजे शिव पुर राज कराय।।

शांतिनाथ पंचम चक्रेश्वर द्धादश मदन तनो पद पाय ।

तिनके चरण कमल के पूजे रोग शोक दुःख दारिद्र जाय ।।

।। ओं ह्रीं श्री शांतिनाथ जिनेन्द्राय अनर्घ पद प्राप्तये अर्घं निर्वपामिति स्वाहा ।।