।। श्री अभिनंदन नाथ - जिनेंद्र ।।

।। श्री अभिनंदन नाथ - जिनेंद्र ।।

अष्ट -द्रव्य सवारि सुन्दर , सुजस गाय रसाल ही।
नचत रचत जजौं चरन - जुग , नाय -नाय सुभाल ही।

कलुष -ताप - निकंद श्री अभिनंद , अनुपम -चंद हैं।
पद -वंद वृंद जजें प्रभू , भव -दंद -फंद -निकंद हैं।

।। ॐ ह्रीं श्री अभिनंदन जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद - प्राप्तये अर्घ्य निर्वपामीति स्वाहा ।।